
एटा। विकासखंड अलीगंज क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय देहलियापूठ का करीब 72 वर्ष पुराना विद्यालय भवन अब बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन गया है। वर्ष 1954 में निर्मित यह भवन लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रहा है। बरसात के दौरान भवन की छत कई स्थानों से टपकती है, लेकिन इसके बावजूद नौनिहाल इसी भवन में पढ़ाई करने और मिड-डे मील ग्रहण करने को मजबूर हैं।
विद्यालय में कुल 86 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन लगातार बारिश और भवन की जर्जर स्थिति के कारण शुक्रवार को केवल 30 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। बारिश के दौरान कक्षाओं में पानी भरने और छत से लगातार रिसाव होने से पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई बार बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित स्थान पर बैठकर कक्षाएं संचालित करनी पड़ती हैं।
नियमित शिक्षक नहीं, सीमित स्टाफ के भरोसे विद्यालय
विद्यालय में नियमित शिक्षक की तैनाती नहीं है। वर्तमान में दो सहायक अध्यापक और दो शिक्षामित्र ही पूरे विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था संभाल रहे हैं। सीमित स्टाफ और जर्जर भवन के बीच शिक्षा व्यवस्था किसी तरह संचालित की जा रही है।
ग्रामीणों में हादसे की आशंका
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि बरसात के मौसम में भवन की हालत और भी खराब हो जाती है। उनका आरोप है कि वर्षों से मरम्मत नहीं होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने शिक्षा विभाग से जर्जर भवन की तत्काल मरम्मत कराने या नए विद्यालय भवन के निर्माण की मांग की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिल सके।
बीईओ बोले— सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
खंड शिक्षा अधिकारी अलीगंज विनोद कुमार ने बताया कि विद्यालय के जर्जर कमरों को चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर के सामने सड़क के दूसरी ओर बने दो नए कमरे उपलब्ध हैं, जहां आवश्यकता पड़ने पर कक्षाएं संचालित कराई जा सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाया जाएगा।
हालांकि सवाल यह है कि जब विद्यालय भवन को जर्जर घोषित किया जा चुका है, तब भी बच्चे टपकती छत के नीचे पढ़ाई और मिड-डे मील लेने को क्यों मजबूर हैं? ग्रामीणों का कहना है कि विभाग को इस समस्या का स्थायी समाधान जल्द से जल्द करना चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना से पहले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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