मितौलिया गांव में दोपहर करीब दो बजे हादसा, किसान के परिवार की आजीविका का बड़ा सहारा छिना; प्रशासन से मुआवजे की मांग

एटा। कोतवाली अलीगंज क्षेत्र के ग्राम मितौलिया में बुधवार दोपहर मूसलाधार बारिश के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। लगातार हो रही तेज बारिश के चलते किसान की कच्ची कोठरी की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। दीवार के मलबे की चपेट में आने से पास में बंधी भैंस दब गई। ग्रामीणों ने मलबा हटाकर उसे बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। हादसे के बाद किसान के परिवार में कोहराम मच गया।

बारिश के बीच अचानक ढह गई कच्ची दीवार

जानकारी के अनुसार बुधवार दोपहर करीब दो बजे मितौलिया गांव में तेज बारिश हो रही थी। लगातार बारिश के कारण कच्ची कोठरी की दीवार कमजोर हो गई और अचानक भरभराकर गिर पड़ी। जिस समय दीवार गिरी, उसके पास ही किसान की भैंस बंधी हुई थी। दीवार के मलबे में दबकर भैंस गंभीर रूप से फंस गई।

हादसे की आवाज सुनकर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण भी बारिश के बीच घटनास्थल पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने तत्काल मलबा हटाकर भैंस को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन काफी प्रयास के बाद बाहर निकाली गई भैंस की मौत हो चुकी थी।

परिवार की आजीविका का सहारा थी भैंस

भैंस की मौत से किसान के परिवार को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। बताया गया कि पशुपालन परिवार की आय का महत्वपूर्ण साधन था और मृत भैंस भी परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक सहयोग करती थी। ऐसे में पशुधन के नुकसान से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

परिजनों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। ऐसे में परिवार के महत्वपूर्ण पशुधन की मौत ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।

राजस्व विभाग को दी सूचना, मुआवजे की मांग

घटना की सूचना राजस्व विभाग को दी गई है। पीड़ित किसान ने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कराने और शासन के नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने भी प्रशासन से बारिश के कारण हुए नुकसान का सर्वे कराकर पात्र परिवारों को शीघ्र राहत दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के चलते कच्चे मकानों और पशुओं के अस्थायी ठिकानों पर खतरा बढ़ गया है।

हादसे के बाद किसान के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोगों का कहना है कि जिस पशु को उनकी आजीविका का सहारा माना जा रहा था, वह बारिश के कारण हुए हादसे में उनसे छिन गया।