
ओखला फेस-1 में सिलेंडर उतारते समय हुआ था विस्फोट, गुरुवार देर रात गांव पहुंचा शव; शुक्रवार को अटैना गंगा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
एटा। दिल्ली के ओखला फेस-1 में ऑक्सीजन सिलेंडर के भीषण विस्फोट में जान गंवाने वाले विकासखंड अलीगंज क्षेत्र के ग्राम गढ़िया जगन्नाथ निवासी मोहित सिंह राठौर का शव गुरुवार देर रात करीब 10 बजे पैतृक गांव पहुंचा। शव पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। पत्नी, पिता और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मृतक के घर पहुंच गए और पूरे गांव में मातम छा गया।
एकलौते बेटे की मौत से टूट गए पिता
मोहित अपने पिता कर्मवीर सिंह के एकलौते बेटे थे। खेती-किसानी करने वाले कर्मवीर सिंह के बुढ़ापे का सहारा अचानक छिन गया। बेटे का शव सामने आते ही वह बदहवास हो गए। परिजनों के मुताबिक, मोहित ही परिवार की जिम्मेदारियों में पिता का हाथ बंटाते थे।
पति का शव देखते ही बेसुध हुईं पत्नी
मोहित की पत्नी रूबी पति का शव देखते ही दहाड़ मारकर रोने लगीं। परिजनों के अनुसार वह बार-बार रोते-रोते बेहोश हो जा रही थीं। घर में महिलाओं की चीख-पुकार से माहौल बेहद गमगीन हो गया।
मोहित अपने पीछे पत्नी रूबी, 11 वर्षीय बेटी पूर्वी और आठ वर्षीय बेटे कार्तिक को छोड़ गए हैं। पिता की अचानक मौत से दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
आठ साल से दिल्ली में कर रहे थे नौकरी
ग्राम प्रधान प्रशासक अखिलेश सिंह राठौर के अनुसार, मोहित पिछले करीब आठ वर्षों से दिल्ली स्थित एसएम ट्रेडर्स में काम कर रहे थे। एसएम ट्रेडर्स की गाड़ी संख्या DL-1LAJ-3232 गाजियाबाद से कॉमर्शियल ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर दिल्ली के ओखला फेस-1 स्थित परिसर में पहुंची थी।
मोहित समेत अन्य कर्मचारी वाहन से सिलेंडर उतारकर गोदाम में रख रहे थे। इसी दौरान एक सिलेंडर वाहन से उतरते समय सड़क पर गिर गया। इसके बाद जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि आसपास की इमारतों के शीशे तक चटक गए। हादसे में मोहित समेत चार कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए थे। मोहित की मौत हो गई।
प्रधान के मुताबिक, विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मोहित के शरीर के चिथड़े उड़ गए थे और शरीर का केवल सीने और सिर का हिस्सा ही बचा था।

20 दिन पहले पिता को इलाज के लिए ले गए थे दिल्ली
मृतक के पिता कर्मवीर सिंह के मुताबिक, करीब 20 दिन पहले मोहित गांव आए थे और उन्हें इलाज के लिए अपने साथ दिल्ली ले गए थे। उन्हें टाइफाइड हुआ था। दिल्ली में इलाज कराने के बाद दोनों पांच सितंबर को ही गांव लौटे थे।
इसके कुछ ही दिन बाद मोहित की दिल्ली में हुए हादसे में जान चली गई। बुधवार सुबह करीब 11 बजे गांव के लोगों ने कर्मवीर सिंह को फोन कर बेटे के साथ हुए हादसे की जानकारी दी थी।

क्षेत्रीय नेताओं ने पहुंचकर बंधाया ढांढस
गुरुवार देर रात शव गांव पहुंचने के बाद अलीगंज विधायक प्रतिनिधि सूरज सिंह राठौर और राजा का रामपुर नगर पंचायत के प्रतिनिधि अर्जुन सिंह राठौर भी मृतक के घर पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
आठ वर्षीय बेटे कार्तिक ने दी पिता को मुखाग्नि
शुक्रवार को मोहित का अंतिम संस्कार फर्रुखाबाद के अटैना गंगा घाट, कंपिल पर किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब महज आठ वर्षीय बेटे कार्तिक ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
15 साल पहले मां का भी हो चुका है निधन
मोहित की मां का करीब 15 वर्ष पहले बीमारी के चलते निधन हो गया था। पिता कर्मवीर सिंह खेती-किसानी करते हैं। परिवार के मुताबिक, मोहित करीब आठ वर्षों से दिल्ली में नौकरी कर परिवार की जिम्मेदारियों में सहयोग कर रहे थे। एकलौते बेटे की मौत के बाद अब पिता कर्मवीर सिंह के सामने बुढ़ापे में परिवार संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
मोहित की मौत से गढ़िया जगन्नाथ गांव में शोक की लहर है। जिस घर में कुछ दिन पहले तक परिवार की खुशियां थीं, वहां अब आठ वर्षीय कार्तिक और 11 वर्षीय पूर्वी की आंखों में पिता को खोने का दर्द और परिवार में मातम पसरा हुआ है।


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