स्कूल-कॉलेजों में छात्र-छात्राओं और बाजारों में आमजन को किया जागरूक, फर्जी कॉल, लिंक और डिजिटल अरेस्ट से सावधान रहने की दी हिदायत

एटा। साइबर अपराधों से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए एटा पुलिस ने बुधवार को जनपदभर में व्यापक साइबर जागरूकता अभियान चलाया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन जी के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी साइबर नीतीश गर्ग के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने थाना क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेजों, बाजारों और ग्राम सभाओं में पहुंचकर छात्र-छात्राओं एवं आमजन को साइबर अपराध के बढ़ते तरीकों के बारे में जानकारी दी।

पुलिसकर्मियों ने लोगों को फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी, फिशिंग लिंक, बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग और फर्जी निवेश योजनाओं से बचाव के तरीके बताए। जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान लोगों को समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक संबंधी विवरण, ओटीपी, पासवर्ड या कार्ड की जानकारी साझा न करें।

UPI पिन और ओटीपी को लेकर किया जागरूक

पुलिस ने बताया कि ऑनलाइन भुगतान करते समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। किसी को भुगतान प्राप्त करने के लिए UPI पिन डालने की आवश्यकता नहीं होती। लोगों को सलाह दी गई कि कार्ड नंबर, वैधता तिथि, सीवीवी और ओटीपी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें।

पुलिस ने यह भी बताया कि यदि किसी परिचित की आवाज में फोन करके ऑनलाइन रुपये मांगे जाएं तो तत्काल भरोसा न करें। पहले संबंधित परिचित को उसके वास्तविक मोबाइल नंबर पर फोन कर इसकी पुष्टि कर लें।

फर्जी लिंक और ट्रेडिंग एप से सावधान रहने की अपील

पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया अथवा अनजान नंबरों से भेजे जाने वाले लिंक के प्रति भी लोगों को सतर्क किया। फर्जी ट्रेडिंग एप के माध्यम से निवेश कराकर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों से सावधान रहने की अपील की गई। सरकारी अधिकारी या कर्मचारी बनकर स्थानांतरण के नाम पर घरेलू सामान सस्ते में बेचने का झांसा देने वालों से भी सतर्क रहने को कहा गया।

विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर आने वाले फर्जी जॉब ऑफर, बीमा के नाम पर लोन या सब्सिडी दिलाने के लिए भेजे गए अनजान लिंक तथा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों को बिना सत्यापन के शेयर करने से बचने की सलाह दी गई।

APK फाइल डाउनलोड न करने की दी हिदायत

पुलिस ने साइबर जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को अनजान नंबरों से आने वाले दस्तावेजों या फाइलों के नाम में APK लिखे होने पर उन्हें डाउनलोड न करने की सलाह दी। पुलिस ने बताया कि ऐसी फाइलें मोबाइल में मौजूद महत्वपूर्ण जानकारी और बैंकिंग विवरण के लिए खतरा बन सकती हैं।

साथ ही लोगों को अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को कमीशन के लालच में उपलब्ध न कराने की सलाह दी गई। पुलिस ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति का बैंक खाता अवैध लेनदेन में इस्तेमाल होता है तो खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी से बचें

पुलिस ने लोगों को तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के बारे में भी जागरूक किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर पुलिस अथवा किसी अन्य सरकारी संस्था का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का भय दिखाए तो घबराकर पैसे न भेजें और तत्काल संबंधित पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और साइबर अपराध की सूचना cybercrime.gov.in पोर्टल पर भी दी जा सकती है। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को रोकने की संभावना बढ़ जाती है।

पुलिस की अपील—सतर्क रहें, दूसरों को भी जागरूक करें

एटा पुलिस ने आमजन से अपील की कि वे स्वयं साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहें और परिवार के सदस्यों, बच्चों तथा आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं, ऐसे में किसी भी अनजान कॉल, लिंक, ऑफर या ऑनलाइन लेनदेन में जल्दबाजी न करें।

पुलिस ने जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को संदेश दिया—“सावधानी ही सुरक्षा है—सतर्क नागरिक ही सुरक्षित नागरिक है।”