जिला कृषि अधिकारी के नेतृत्व में कई उर्वरक प्रतिष्ठानों और सहकारी समितियों का औचक निरीक्षण, स्टॉक और बिक्री रजिस्टर खंगाले; किसानों को निर्धारित दर पर खाद देने के निर्देश

एटा। किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक निर्धारित दर पर उपलब्ध कराने और खाद की कालाबाजारी, ओवररेटिंग तथा अनियमित बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने बुधवार को जिलेभर में उर्वरक बिक्री प्रतिष्ठानों और सहकारी समितियों पर सघन निरीक्षण एवं छापेमार कार्रवाई की। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह के निर्देश पर जिला कृषि अधिकारी मनवीर सिंह के नेतृत्व में गठित टीमों ने विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर खाद के स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, अभिलेख और निर्धारित दरों की जांच की।

कई खाद प्रतिष्ठानों पर पहुंची कृषि विभाग की टीम

निरीक्षण के दौरान कृभको अलीगंज रोड, केंद्रीय थोक उपभोक्ता भंडार मंडी समिति, इफको मंडी समिति, कन्हैया ट्रेडर्स, देवेंद्र सिंह ट्रेडर्स, किसान सेवा केंद्र हरचंदपुर कला तथा अनुज ट्रेडर्स आसपुर-सकीट समेत विभिन्न उर्वरक प्रतिष्ठानों और सहकारी समितियों की जांच की गई।

टीमों ने प्रतिष्ठानों पर उपलब्ध उर्वरक के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया। इसके साथ ही बिक्री रजिस्टर, अभिलेख और किसानों को दी जा रही खाद की निर्धारित दर की भी जांच की गई। अधिकारियों ने यह भी देखा कि बिक्री रजिस्टर में किसानों की फार्मर आईडी और उर्वरक की कीमत दर्ज की जा रही है या नहीं।

निरीक्षण के दौरान आवश्यकतानुसार उर्वरकों के नमूने भी लिए गए, जिन्हें गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।

निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने पर होगी कार्रवाई

कृषि विभाग ने सभी सहकारी समितियों और निजी उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को उनकी पात्रता और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। किसी भी किसान से निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने विक्रेताओं को चेतावनी दी कि खाद की बिक्री में किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

खाद के साथ दूसरी सामग्री लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे दुकानदार

निरीक्षण के दौरान कृषि विभाग ने खाद विक्रेताओं को विशेष रूप से निर्देशित किया कि किसानों को उर्वरक के साथ किसी अन्य उत्पाद की खरीद के लिए बाध्य न किया जाए।

किसानों को खाद के साथ अन्य उर्वरक, बीज, कीटनाशक या किसी दूसरी सामग्री की टैगिंग करना प्रतिबंधित है। यदि कोई विक्रेता खाद लेने वाले किसान को जबरन दूसरी सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जिले में यूरिया और डीएपी का पर्याप्त स्टॉक

जिला कृषि अधिकारी मनवीर सिंह ने बताया कि जिले में फिलहाल उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने बताया कि जनपद में करीब 21,618 मीट्रिक टन यूरिया और 10,497 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। इसके अलावा एनपीके सहित अन्य उर्वरक भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं।

उन्होंने किसानों से अपील की कि खाद की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की अफवाह पर भरोसा न करें और घबराकर जरूरत से अधिक उर्वरक खरीदकर भंडारण न करें। किसान अपनी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद खरीदें।

खाद खरीदते समय फार्मर रजिस्ट्री और खतौनी रखें साथ

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरक खरीदते समय अपनी फार्मर रजिस्ट्री और खतौनी साथ रखें। इससे पात्रता के अनुसार उर्वरक वितरण में सुविधा होगी।

वहीं जिन किसानों की किसी कारणवश फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पाई है अथवा जिनका क्षेत्र चकबंदी प्रक्रिया में है, उन्हें भी खाद से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसे किसानों को नियमानुसार खतौनी के आधार पर निर्धारित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।

जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट किया कि केवल फार्मर रजिस्ट्री नहीं होने के आधार पर किसी पात्र किसान को उर्वरक देने से मना नहीं किया जा सकता।

कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर होगी कठोर कार्रवाई

कृषि विभाग ने साफ किया कि उर्वरक की ओवररेटिंग, कालाबाजारी, अवैध या अनियमित भंडारण, टैगिंग और निर्धारित नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ऐसे मामलों में संबंधित विक्रेता के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विक्रेता की होगी।

लगातार आती रहेंगी खाद की रैक, किसान न करें अग्रिम खरीद

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जनपद में लगातार उर्वरक की रैक पहुंच रही हैं। इसलिए किसानों को खाद की कमी की आशंका में अग्रिम खरीद या अनावश्यक भंडारण करने की जरूरत नहीं है।

विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें, अपनी वास्तविक जरूरत के मुताबिक ही उर्वरक खरीदें और यदि कोई विक्रेता निर्धारित दर से अधिक कीमत मांगता है, खाद के साथ दूसरी सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाता है या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता करता है तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक प्रतिष्ठानों की जांच और निगरानी का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।