सकीट (एटा)। विकासखंड सकीट क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भरतौली में मंगलवार को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस एवं अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय परिसर में पौधरोपण से किया गया। इसके बाद बच्चों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर जंगलों की कटाई और वन्यजीवों के शिकार से होने वाले दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया। विद्यार्थियों ने पोस्टर एवं स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और “पेड़ लगाओ, धरती बचाओ” तथा “बाघ बचेगा तो जंगल बचेगा” जैसे प्रेरक नारों से सभी को जागरूक किया।

विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका अंजू जादौन ने बताया कि इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “प्रकृति का संरक्षण, जीवन का संरक्षण” एवं “टाइगर बचाओ, जंगल बचाओ” रखी गई। उन्होंने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, जल एवं ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक के कम उपयोग तथा जंगली जीवों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाघ हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण रक्षक हैं और उनकी मौजूदगी स्वस्थ जंगलों का प्रतीक है।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपनी माताओं एवं अभिभावकों के साथ पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी ली। सभी ने जल संरक्षण, कचरा कम करने और प्रकृति की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

प्रधानाध्यापिका अंजू जादौन ने कहा कि बच्चों में बचपन से ही प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विद्यालय में प्रत्येक माह ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि नई पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बन सके।