
चार्ट प्रोजेक्ट के जरिए समझी रणनीति, आशा, आंगनबाड़ी और एएनएम के 10 समूहों ने तैयार की कार्ययोजना
एटा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अलीगंज में GAVI एवं PCI India के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय जीरो डोज इम्प्लीमेंटेशन प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रतिभागियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें नियमित टीकाकरण से जोड़ना है, जिन्हें अब तक नियमित टीकाकरण की पहली खुराक भी नहीं मिली है।
दूसरे दिन प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को 10 समूहों में विभाजित किया गया। प्रत्येक समूह को चार्ट पर प्रोजेक्ट तैयार करने का कार्य सौंपा गया, जिसमें जीरो डोज बच्चों की पहचान, उनके परिवारों तक पहुंच, टीकाकरण से छूटने के कारणों का विश्लेषण तथा उन्हें नियमित टीकाकरण सत्रों से जोड़ने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।
प्रशिक्षण में बताया गया कि जीरो डोज वे बच्चे हैं जिन्हें नियमित टीकाकरण की शुरुआत में लगने वाला कोई भी टीका नहीं मिला है। ऐसे बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इनके गंभीर संक्रामक रोगों की चपेट में आने का खतरा अधिक रहता है।
समूह आधारित गतिविधियों के दौरान प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की। इसमें घर-घर संपर्क अभियान, अभिभावकों की काउंसलिंग, लाभार्थियों का नियमित फॉलोअप, टीकाकरण सत्रों की जानकारी देना, माइक्रोप्लान तैयार करना तथा रिकॉर्ड अपडेट रखने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षकों ने स्पष्ट किया कि केवल जीरो डोज बच्चों की पहचान कर सूची बनाना पर्याप्त नहीं है। संबंधित परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखना, बच्चे को टीकाकरण सत्र तक पहुंचाना और यदि किसी कारणवश टीका नहीं लग पाता है तो पुनः फॉलोअप करना भी स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी है। इसके लिए आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष बल दिया गया।
प्रशिक्षण के पहले दिन बीपीएम सुश्री दिव्यांशी, PCI GAVI के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पुष्पेंद्र सिंह एवं भानु प्रताप तथा WHO के फील्ड मॉनिटर अतुल चतुर्वेदी ने प्रतिभागियों को जीरो डोज बच्चों की पहचान, डेटा प्रबंधन, माइक्रोप्लानिंग और प्रभावी कार्ययोजना के संबंध में जानकारी दी थी। दूसरे दिन इन्हीं विषयों को समूह गतिविधियों और चार्ट प्रोजेक्ट के माध्यम से व्यवहारिक रूप में समझाया गया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य कर्मियों को समुदाय में टीकाकरण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा अभिभावकों को नियमित टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक करने के प्रभावी तरीके भी बताए गए। साथ ही निर्देश दिए गए कि अपने-अपने क्षेत्रों में टीकाकरण से वंचित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं से जोड़ने के लिए सतत प्रयास किए जाएं।
प्रशिक्षण के अंत में सभी समूहों ने अपने-अपने चार्ट प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने फील्ड में आने वाली समस्याओं, उनके संभावित समाधान और प्रभावी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से फील्ड कार्यकर्ताओं की क्षमता को मजबूत बनाते हुए अलीगंज क्षेत्र का कोई भी पात्र बच्चा नियमित टीकाकरण से वंचित न रहे।

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