मिर्जापुर सई में जांच के दौरान गेहूं, चावल, बाजरा और चीनी की मात्रा मिली कम; कार्डधारकों ने भी कम राशन देने की शिकायत की
एटा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन की अनियमितता और कालाबाजारी के मामले में जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। विकासखंड सकीट की ग्राम पंचायत मिर्जापुर सई में उचित दर विक्रेता की दुकान की जांच के दौरान अभिलेखीय और भौतिक सत्यापन में खाद्यान्न की मात्रा कम मिलने पर कोटेदार समेत दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामला आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत दर्ज कराया गया है।
पूर्ति निरीक्षक गुलशन कुमार की जांच में दुकान पर गेहूं, चावल, बाजरा और चीनी निर्धारित अवशेष मात्रा से कम मिली। अभिलेखों में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध खाद्यान्न के मिलान में अंतर सामने आया। जांच के दौरान कई कार्डधारकों ने भी निर्धारित मानक के अनुरूप राशन नहीं मिलने और कम मात्रा में खाद्यान्न दिए जाने की शिकायत की।
दुकान पर व्यवस्थाएं भी मिलीं अधूरी
जांच के दौरान उचित दर की दुकान पर निर्धारित रेट, सूचना बोर्ड और संबंधित हेल्पलाइन की जानकारी भी मानक के अनुरूप प्रदर्शित नहीं मिली। इसके अलावा दुकान का संचालन भी कोटेदार द्वारा स्वयं न कराकर अपने भतीजे के सहयोग से कराया जाना पाया गया।
जांच आख्या के अनुसार उचित दर विक्रेता प्रमोद कुमार द्वारा दुकान का संचालन स्वयं न कराकर अपने भतीजे दीपक यादव पुत्र विनोद कुमार के सहयोग से कराया जा रहा था। दुकान में कम मिले खाद्यान्न की कालाबाजारी किए जाने की पुष्टि जांच आख्या में की गई है।
कोटेदार समेत दो के खिलाफ मुकदमा
मामले में उचित दर विक्रेता प्रमोद कुमार और दीपक यादव के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराया गया है। कार्रवाई के बाद राशन वितरण व्यवस्था से जुड़े विक्रेताओं में भी हड़कंप मचा है।
जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनियमितता, खाद्यान्न की कालाबाजारी या पात्र लाभार्थियों को उनके अधिकार से वंचित करने का मामला सामने आने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा और मानक के अनुरूप राशन उपलब्ध कराना है।
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