नई दिल्ली, 19 जुलाई 2026: राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले 25 दिनों से चल रहा ‘परीक्षा-सुधार’ आंदोलन शनिवार सुबह एक नए मोड़ पर पहुंच गया। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह के बाद दिल्ली पुलिस ने क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक 20 जून से NEET पेपर लीक और CBSE मूल्यांकन में गड़बड़ी के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। उनकी बिगड़ती हालत – वजन 5 किलो कम, कीटोन बॉडी 5 गुना बढ़ी – के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। 

क्या हुआ शनिवार सुबह?
सुबह 6 बजे के करीब भारी पुलिस बल, CRPF और पैरामिलिट्री के जवान जंतर-मंतर पहुंचे। 270 बॉडी-कैम, ड्रोन, CCTV और कई लेयर बैरिकेड के बीच पुलिस ने वांगचुक को स्ट्रेचर पर लिटाकर एंबुलेंस में शिफ्ट किया। इस दौरान कुछ समर्थकों ने रास्ता रोकने की कोशिश की तो हल्की धक्का-मुक्की हुई। DCP न्यू दिल्ली सचिन शर्मा ने कहा, “हमने अधिकतम संयम बरता। कोई लाठीचार्ज नहीं हुआ, न किसी को डिटेन किया गया”। हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) फाउंडर अभिजीत डिपके का आरोप है कि “60 साल के बुजुर्ग को घसीटकर ले गए, मुझे भी पीटा गया”। 

अब कौन संभाल रहा है मोर्चा?
वांगचुक के अस्पताल जाते ही CJP के अभिजीत डिपके ने उसी टेंट में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा, “ये लड़ाई किसी एक की नहीं, करोड़ों छात्रों के भविष्य की है। जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और एग्जाम सिस्टम में पारदर्शिता नहीं आती, हम हटेंगे नहीं”। डिपके के समर्थन में शनिवार दोपहर 1 बजे CJP ने जंतर-मंतर पर दूसरी बड़ी रैली बुलाई थी, जिसके लिए दिल्ली पुलिस ने पहले से अनुमति दे दी थी। 

आंदोलन की 3 बड़ी मांगें:

  1. NEET-UG 2026 पेपर लीक की CBI जांच और दोषियों को सख्त सजा।
  2. CBSE मूल्यांकन प्रणाली में AI-बेस्ड प्रॉक्टरिंग और थर्ड-पार्टी ऑडिट।
  3. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने वीडियो संदेश में अभिभावकों से अपील की, “एक्टिविस्ट आपके बच्चों के लिए भूखे बैठे हैं, आप घर में क्यों हैं? जंतर-मंतर आइए”। 

स्याही कांड से गरमाया माहौल:
शनिवार दोपहर एक महिला ने डिपके पर नीली स्याही फेंक दी। महिला को हिरासत में ले लिया गया। डिपके ने X पर लिखा, “Blue is my colour… Jai Bhim! ये हमें रोक नहीं सकते”। पुलिस इसे “सिक्योरिटी ब्रीच” मानकर जांच कर रही है।

हाईकोर्ट में PIL:
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में PIL दाखिल कर आरोप लगाया कि पुलिस “लगातार और घुसपैठिया सर्विलांस” कर रही है। मोबाइल-कैमरा लेकर घूमने से छात्रों का मनोबल टूट रहा है। कोर्ट ने 4 जुलाई को दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। 

सफदरजंग अस्पताल बना नया ‘जंतर-मंतर’:
वांगचुक के भर्ती होते ही अस्पताल के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी। पुलिस ने इमरजेंसी गेट पर अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वांगचुक की हालत “स्टेबल लेकिन कमजोर” है। डॉक्टरों ने IV फ्लूड शुरू किया है।

दिल्ली पुलिस की तैयारी:
पूरे नई दिल्ली जिले में धारा-144 जैसी स्थिति है। जंतर-मंतर के 500 मीटर दायरे में 12 लेयर बैरिकेड, वाटर कैनन, ड्रोन जैमर लगाए गए हैं। पुलिस कमिश्नर ने कहा, “हम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं”। 

आगे क्या?
CJP ने 21 जुलाई को “छात्र संसद” बुलाने का ऐलान किया है। वहीं, शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि “NEET पर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है, हम टिप्पणी नहीं करेंगे”। उधर, वांगचुक ने अस्पताल से वीडियो जारी कर कहा, “मेरा शरीर कमजोर हो सकता है, इरादा नहीं। लड़ाई जारी रहेगी”।

जंतर-मंतर अब खाली करा लिया गया है, लेकिन परीक्षा-सुधार की ये लड़ाई दिल्ली की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया और अस्पताल के वार्ड तक फैल चुकी है। छात्रों की एक पूरी पीढ़ी की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी है।