वीडियो वायरल होते ही सीएमओ ने लिया संज्ञान, जिला मलेरिया अधिकारी के साथ देर रात किया निरीक्षण; स्वास्थ्यकर्मियों के लिखित बयान लिए, नाइट ड्यूटी और मेडिको-लीगल व्यवस्था पर भी उठे सवाल

Etah। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अलीगंज में दवाइयां जलाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। वीडियो में सरकारी अस्पताल परिसर में दवाइयों के कार्टून जलते दिखाई दे रहे हैं। मामला संज्ञान में आते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद मंगलवार रात करीब 10:40 बजे जिला मलेरिया अधिकारी लोकमान दास के साथ अचानक सीएचसी अलीगंज पहुंच गए। देर रात हुए निरीक्षण में अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल सामने आए। सीएमओ ने मौके पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों से पूछताछ कर उनके लिखित बयान भी लिए।

एक भी नियमित चिकित्सक अस्पताल में नहीं मिला

सीएमओ के निरीक्षण के दौरान एक भी नियमित चिकित्सक अस्पताल परिसर में मौजूद नहीं मिला। सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद के अनुसार, कोई भी नियमित चिकित्सक अस्पताल परिसर में रहकर निवास नहीं कर रहा था। नाइट ड्यूटी की व्यवस्था और रात में चिकित्सकों की उपलब्धता के संबंध में भी कर्मचारियों से जानकारी ली गई।

निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति पर सीएमओ ने नाराजगी जताई। स्वास्थ्यकर्मियों के लिखित बयानों में भी अस्पताल की व्यवस्थाओं से संबंधित कई बिंदु सामने आने की बात कही गई है।

प्रभारी चिकित्साधीक्षक समेत चार नियमित डॉक्टरों का वेतन रोका

सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वीडियो सामने आने के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए रात में ही सीएचसी का निरीक्षण किया। मौके पर स्वास्थ्यकर्मियों के बयान दर्ज किए गए।

उन्होंने बताया कि प्रभारी चिकित्साधीक्षक समेत चारों नियमित चिकित्सकों का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है। सीएमओ के मुताबिक अस्पताल में कोई भी नियमित चिकित्सक परिसर में रहकर निवास करता नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नाइट ड्यूटी और मेडिको-लीगल व्यवस्था पर भी सवाल

निरीक्षण के दौरान नाइट ड्यूटी को लेकर भी अधिकारियों ने जानकारी जुटाई। चिकित्सकों की तैनाती और रात में उनकी उपलब्धता के संबंध में कर्मचारियों से पूछताछ की गई।

इसके साथ ही अस्पताल की मेडिको-लीगल व्यवस्था भी जांच के दायरे में आई। मेडिको-लीगल सेवा ऑफलाइन होने की जानकारी मिलने पर सीएमओ ने इस व्यवस्था के संबंध में भी अधिकारियों और कर्मचारियों से जानकारी ली।

एलटी ने सीएमओ को सौंपा शिकायत पत्र

निरीक्षण के दौरान लैब टेक्नीशियन आकाश राजपूत भी सीएचसी पहुंच गए। उन्होंने सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद को लिखित शिकायत देकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया।

शिकायत में आकाश राजपूत ने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक माह से प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ. सर्वेश और डॉ. राजेश शर्मा की ओर से उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उनका आरोप है कि जिस कमरे में लैब का सामान रखा था, वहां से सामान निकलवाकर बाहर रखवा दिया गया और कमरे में दो ताले डाल दिए गए।

एलटी ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि कमरे को आशा कार्यकत्री मीरा देवी को दिए जाने की तैयारी की जा रही थी। शिकायत के अनुसार, आशा कार्यकत्री अपने परिवार के साथ अस्पताल परिसर में रह रही थीं।

आशा कार्यकत्री को परिसर में न रहने के निर्देश

शिकायत मिलने के बाद सीएमओ ने तत्काल निर्देश दिए कि आशा कार्यकत्री मीरा देवी अस्पताल परिसर में निवास न करें। वहीं एलटी आकाश राजपूत को उसी कमरे में लैब का सामान रखने और मरीजों को सेवाएं जारी रखने के निर्देश दिए गए।

सीएमओ के निर्देश के बाद अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के आवास और कमरों के इस्तेमाल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

वीडियो में एमोक्सिसिलिन की दवा और सीरप के कार्टून दिखाई दिए

दवाइयां जलाने के वायरल वीडियो में दवाइयों के कार्टून और रैपर दिखाई दे रहे हैं। एक रैपर पर एमोक्सिसिलिन डिस्पर्सिबल टैबलेट लिखा दिखाई देता है। इसके अलावा सीरप के कार्टून भी वीडियो में नजर आ रहे हैं।

वीडियो में मौजूद व्यक्ति सरकारी अस्पताल में दवाइयां जलाए जाने की बात कहता सुनाई दे रहा है। धुएं से आसपास के लोगों को परेशानी होने की बात भी कही गई है।

हालांकि, दवाइयां किस कारण से नष्ट की जा रही थीं, उनकी वैधता अवधि क्या थी और उन्हें नष्ट करने के लिए विभागीय स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

धुएं से परिवार के लोगों को परेशानी का दावा

अस्पताल के पड़ोस में रहने वाले राहुल गुप्ता ने बताया कि वह घर पर बैठे थे। इसी दौरान अचानक तेज धुआं उनके घर की ओर आने लगा। धुआं देखकर वह अस्पताल पहुंचे तो वहां दवाइयां जलती हुई दिखाई दीं।

राहुल के अनुसार, मौके पर दवाइयों के कई कार्टून रखे हुए थे। उन्होंने दावा किया कि धुएं की वजह से उनके परिवार के लोगों को परेशानी हुई और बच्चों की तबीयत खराब हो गई। उनके छोटे भाई को उल्टी होने की बात भी उन्होंने कही।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मंडल अध्यक्ष ने लगाया हर महीने दवाइयां जलाने का आरोप

मामले की जानकारी मिलने पर भाजपा मंडल अध्यक्ष विमल कुमार गुप्ता भी सीएचसी पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में मरीजों को दवाइयां वितरित नहीं की जाती हैं और इसी तरह हर महीने दवाइयां जलाए जाने की बात सामने आती है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

हालांकि, हर महीने दवाइयां जलाए जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दवाइयां किस कारण और किस प्रक्रिया के तहत नष्ट की जा रही थीं।

CMO बोले- जांच के बाद होगी कड़ी कार्रवाई

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि सीएचसी अलीगंज में दवाइयां जलाए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद वह जिला मलेरिया अधिकारी लोकमान दास के साथ देर रात मौके पर पहुंचे थे। स्वास्थ्यकर्मियों से पूछताछ कर उनके लिखित बयान लिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि प्रभारी चिकित्साधीक्षक समेत चारों नियमित चिकित्सकों का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है। निरीक्षण के दौरान कोई भी नियमित चिकित्सक अस्पताल परिसर में निवास करता नहीं मिला। सीएमओ ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दवाइयां जलाए जाने के वीडियो के बाद हुई देर रात की कार्रवाई ने अलीगंज सीएचसी की व्यवस्थाओं को सवालों के घेरे में ला दिया है। अब विभागीय जांच में दवाइयों को नष्ट किए जाने का कारण, उनकी वैधता अवधि, निस्तारण की अपनाई गई प्रक्रिया, नाइट ड्यूटी में चिकित्सकों की उपलब्धता, मेडिको-लीगल सेवाओं और अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के आवास से जुड़े मामलों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।