फर्जी मेडिकल कॉलेज में डी फार्मा, बी फार्मा, नर्सिंग समेत मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के नाम पर ठगी का आरोप; पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया

अपहरण की सूचना निकली झूठी, पैसे वापस न करने पड़ें इसलिए रची साजिश; लैपटॉप, फर्जी मार्कशीट, चेक, मुहर, आईकार्ड और फीस रसीदें बरामद

एटा। एटा पुलिस ने मारहरा थाना क्षेत्र में कथित रूप से संचालित फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी मेडिकल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश और शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने के नाम पर छात्र-छात्राओं से ठगी करते थे। जांच के दौरान फर्जी मार्कशीट, आईकार्ड, फीस रसीद, चेक, मुहर, प्रश्नपत्र, परीक्षा पुस्तिकाएं और अन्य दस्तावेज बरामद होने का दावा किया गया है।

पुलिस के अनुसार मामले की शुरुआत 16 सितंबर को सतेंद्र कुमार के भाई रामसेवक द्वारा डायल 112 पर दी गई अपहरण की सूचना से हुई। सूचना में आरोप लगाया गया था कि अर्टिगा कार सवार तीन लोगों ने सतेंद्र का अपहरण कर लिया है और 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तलाश शुरू की और सतेंद्र को आगरा से सकुशल बरामद कर लिया।

जांच आगे बढ़ी तो अपहरण की कहानी पर उठे सवाल

पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान अपहरण की सूचना संदिग्ध पाई गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन जी के निर्देशन में मामले की जांच आगे बढ़ाई गई तो कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी से जुड़े कई तथ्य सामने आए।

पुलिस का दावा है कि सतेंद्र कुमार ही कथित फर्जी यूनिवर्सिटी का मास्टरमाइंड और प्रधानाचार्य था तथा उसने ठगी की रकम वापस करने से बचने और शिकायतकर्ताओं को कथित रूप से फंसाने के उद्देश्य से अपने ही अपहरण की साजिश रची। पुलिस ने अपहरण की सूचना को फर्जी पाए जाने के बाद मामले की जांच को इसी दिशा में आगे बढ़ाया।

2022 से मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के नाम पर ठगी का आरोप

पुलिस जांच के अनुसार सतेंद्र कुमार वर्ष 2022 से बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी के नाम से संस्थान संचालित कर रहा था। यहां छात्र-छात्राओं को डी फार्मा, बी फार्मा, बीएससी नर्सिंग, डीएमएलटी, बीएमएलटी, जीएनएम और एएनएम जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने तथा शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था।

पुलिस के अनुसार छात्रों और उनके परिजनों से फीस के नाम पर रकम ली जाती थी और बाद में कथित रूप से फर्जी मार्कशीट एवं अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस ने इस पूरे फर्जीवाड़े में दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी किए जाने की बात बताई है। हालांकि ठगी की कुल रकम का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

चाय बेचने वाले के नाम पर संचालित था संस्थान

पुलिस के अनुसार कथित फर्जी संस्थान के संचालन में अलग-अलग लोगों की भूमिका सामने आई है। गिरफ्तार आरोपियों में सतेंद्र कुमार पुत्र दर्शनपाल सिंह, निवासी महमूदपुर नगरिया, थाना मारहरा, उम्र 36 वर्ष को कथित रूप से फर्जी प्रधानाचार्य बताया गया है।

वहीं गौरव अग्रवाल पुत्र सुभाष चंद्र, निवासी नदरई, कासगंज, भगवान दास पुत्र निरंजन लाल, निवासी धरपसी, थाना मारहरा, उम्र 59 वर्ष, नरेंद्र उर्फ पप्पू पुत्र इतवारी, निवासी मोहल्ला पैठ, थाना मारहरा, उम्र 58 वर्ष तथा मुहम्मद शरीफ कुरैशी पुत्र अब्दुल मजीद, निवासी गफूरगंज, थाना मारहरा, उम्र 75 वर्ष को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार भगवान दास चाय बेचने का काम करता है और उसके नाम पर कथित रूप से मेडिकल कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी संचालित की जा रही थी। वहीं गौरव अग्रवाल को भी संस्थान से जुड़े प्रमुख आरोपियों में शामिल बताया गया है।

फर्जी दस्तावेजों का मिला जखीरा

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कथित फर्जीवाड़े से जुड़े कई सामान बरामद किए हैं। इनमें एक लैपटॉप, चार फर्जी चेक, 16 छात्रों के फर्जी आईकार्ड, एप्लीकेशन फॉर्म, अटेंडेंस शीट, फीस रसीदें, परीक्षा पुस्तिकाएं, प्रश्नपत्र, फर्जी मुहर, प्रचार सामग्री, मुहर लगे फर्जी लेटर पैड और मार्कशीट शामिल हैं।

पुलिस अब बरामद दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि कितने छात्र-छात्राओं को कथित रूप से फर्जी दस्तावेज दिए गए और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

पांचों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया

पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय के समक्ष पेश किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में आगे की विवेचना जारी है। जांच के दौरान फर्जी संस्थान के संचालन, छात्रों से ली गई रकम, जारी किए गए दस्तावेजों और अन्य संभावित सहयोगियों के संबंध में और तथ्य सामने आने की संभावना है।

मामले की जानकारी अपर पुलिस अधीक्षक श्वेताभ पांडेय ने दी। पुलिस का कहना है कि फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नाम पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।