ग्राम गलारपुर के बाद नगला सावा में भी कृषि विभाग ने लगाई कृषक गोष्ठी, फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों को किया जागरूक

एटा। खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। विकासखंड अलीगंज के ग्राम गलारपुर में आयोजित कृषक गोष्ठी में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि खेत में पराली या अन्य फसल अवशेष जलाते पाए जाने पर संबंधित किसान के खिलाफ नियमानुसार जुर्माना लगाने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

गोष्ठी में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि फसल कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को जलाना मिट्टी की सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक है। पराली जलाने से मिट्टी के उपयोगी जीवाणु और पोषक तत्व प्रभावित होते हैं, जिससे खेत की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वहीं, पराली के धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है।

किसानों को बताया गया कि फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन किया जाए। पराली को खेत में मिलाकर जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। विभाग ने किसानों को फसल अवशेषों के अन्य वैकल्पिक उपयोगों की भी जानकारी दी।

कृषि विभाग के एटीएम सुखबीर सिंह ने कहा कि फसल अवशेष जलाना नियमों के विरुद्ध है। यदि कोई किसान अपने खेत में पराली अथवा फसल अवशेष जलाता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार जुर्माने के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि पर्यावरण संरक्षण के साथ खेत की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए पराली न जलाएं और कृषि विभाग द्वारा बताए गए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं।

नगला सावा में भी लगाया जागरूकता कैंप

गलारपुर के बाद कृषि विभाग की टीम ने ग्राम नगला सावा में भी कृषक गोष्ठी एवं जागरूकता कैंप आयोजित किया। यहां किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन, पराली न जलाने तथा उसके वैकल्पिक उपयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने किसानों से कहा कि वे स्वयं जागरूक होने के साथ आसपास के अन्य किसानों को भी पराली न जलाने के लिए प्रेरित करें।

कृषि विभाग ने किसानों को आगाह किया कि पराली जलाने से होने वाले नुकसान को रोकने में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। विभाग की ओर से गांव-गांव जाकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को फसल अवशेषों के सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।