एटा। तहसील एवं कोतवाली जलेसर क्षेत्र के ग्राम नगला अहीर (मजरा बढ़ावली) में सरकारी नाली पर खड़े 24 हरे एवं फलदार पेड़ों के अवैध कटान का मामला सामने आया है। वन विभाग की जांच में पेड़ों के कटान की पुष्टि होने के बाद वन रक्षक की तहरीर पर पुलिस ने 28 से अधिक नामजद आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश ग्रामीण एवं वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 की धारा 4/10 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, गांव निवासी मनोज कुमार पुत्र महेंद्र सिंह ने वन विभाग एवं सिंचाई विभाग से शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि गांव के कुछ लोगों ने सरकारी नाली पर लगे आम, जामुन, शहतूत, अमरूद, शीशम और नीम सहित कई हरे एवं फलदार पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने इससे पहले 15 जून को सरकारी नाली तोड़े जाने की शिकायत सिंचाई विभाग से की थी। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने पेड़ों को काटकर उन्हें झूठे मामले में फंसाने का प्रयास किया।

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 13 जुलाई को वन रक्षक प्रभारी अंशुल कुमार एवं वन रक्षक चमन सिंह की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान नौ पेड़ों के कटे हुए ठूंठ मौके पर मिले, जबकि 15 पेड़ों के ठूंठ जेसीबी मशीन से उखाड़े जाने के साक्ष्य मिले। टीम ने पाया कि कटान के बाद अधिकांश लकड़ी और अन्य अवशेष मौके से हटा दिए गए थे।

वन रक्षक अंशुल कुमार की तहरीर के आधार पर जलेसर कोतवाली पुलिस ने मानवेन्द्र, गौरव, छोटू, लाखन, भूपेन्द्र, विजेन्द्र, कंचन, अमन, आरजू, अवनीश, अंकित, पवन, वीरेन्द्र, सचिन, कपिल, चिरंजीलाल, माधव सिंह, विक्रम, बनी सिंह, रिंकू, विवेक, रजनीश, संजय, कुलदीप, महीपाल, वेदप्रकाश, विमल कुमार सहित 28 से अधिक लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है।

दिव्यांग शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने बताया कि नाली तोड़ने की शिकायत के मामले में 17 जून को पुलिस ने तीन आरोपियों का शांति भंग में चालान भी किया था। उनका आरोप है कि इसी रंजिश में आरोपियों ने दर्जनों फलदार पेड़ों को काट दिया और अब उन्हें लगातार जान से मारने तथा गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं।

पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।