एटा। जनपद एटा में वर्ष 1993 के बहुचर्चित हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत प्रभावी पैरवी के चलते अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-01) एटा ने थाना जैथरा क्षेत्र के चार दोषियों को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 38-38 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

पुलिस के अनुसार 21 मई 1993 को थाना जैथरा में दर्ज मुकदमा संख्या 116/1993 में आरोप था कि अभियुक्तों ने वादी के भाई को गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के संबंध में थाना जैथरा पर धारा 148, 149, 307 और 302 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य एकत्र कर मिंटू पुत्र रूप सिंह, बृजपाल उर्फ विजयपाल सिंह पुत्र हेत सिंह, पप्पू उर्फ कुसुम कुमार पुत्र सूरजपाल तथा दुर्विजय सिंह पुत्र किशन उर्फ किशनपाल, निवासी बनियाढारा थाना जैथरा, के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के निर्देशन में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के अंतर्गत इस मुकदमे को प्राथमिकता पर चिन्हित किया गया। मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन शाखा ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप 18 जुलाई 2026 को एडीजे-01 न्यायालय ने चारों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास तथा प्रत्येक पर ₹38,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई।