
एटा। विकासखंड अलीगंज सभागार में जिला सेवायोजन कार्यालय एटा के तत्वावधान में एसआईएस सिक्योरिटी कंपनी द्वारा रोजगार कैंप का आयोजन किया गया। कैंप में सुरक्षा गार्ड के पदों पर भर्ती के लिए 15 युवाओं ने आवेदन किया, जिनमें से दो युवाओं का भर्ती प्रक्रिया के लिए पंजीकरण किया गया। इसी दौरान एक युवक ने कंपनी पर भर्ती के नाम पर धनराशि लेने और तैनाती न देने का आरोप लगाया, जिस पर कंपनी के भर्ती अधिकारी ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
विकासखंड जैथरा के ग्राम ढकपुरा निवासी प्रबल सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले जैथरा ब्लॉक में आयोजित एसआईएस के रोजगार कैंप में भाग लिया था, जहां उनसे ₹350 पंजीकरण शुल्क लिया गया। इसके बाद दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने पर उन्हें दिल्ली बुलाया गया, जहां भर्ती प्रक्रिया के तहत ₹10,500 जमा कराए गए।
प्रबल सिंह का आरोप है कि दस्तावेजों में कुछ कमी होने के कारण उन्हें वापस घर लौटना पड़ा। बाद में दोबारा कंपनी पहुंचने पर वहां मौजूद राहुल दीक्षित नामक कर्मचारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तैनाती तथा रहने-खाने की व्यवस्था के बारे में जानकारी मांगने पर उनके साथ गाली-गलौज की गई। इसके बाद वे वापस लौट आए और अब तक उनकी जमा धनराशि भी वापस नहीं की गई। अलीगंज में रोजगार कैंप की सूचना मिलने पर उन्होंने मौके पर पहुंचकर अपनी शिकायत दोहराई और कार्रवाई की मांग की।
वहीं एसआईएस इंडिया लिमिटेड के भर्ती अधिकारी पी.एन. मालिक ने युवक द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि एसआईएस इंडिया लिमिटेड एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा सेवा कंपनी है, जहां चयनित अभ्यर्थियों को पहले प्रशिक्षण दिया जाता है और उसके बाद विभिन्न संस्थानों में सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्ति की जाती है।
भर्ती अधिकारी के अनुसार प्रशिक्षण अवधि के दौरान कंपनी ₹10,500 की सिक्योरिटी मनी लेती है, जिसे एक वर्ष के भीतर ₹7,500 की दो किस्तों के माध्यम से कुल ₹15,000 के रूप में अभ्यर्थी को वापस किया जाता है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता ने केवल पांच दिन का प्रशिक्षण लिया था और बाद में कंपनी द्वारा बुलाए जाने के बावजूद नियमित रूप से प्रशिक्षण के लिए उपस्थित नहीं हुए। इसलिए उनके द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता और कंपनी के अलग-अलग दावों का है। मामले में किसी सक्षम सरकारी एजेंसी द्वारा आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।
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