जमानत, पेशी की तारीख और अधिवक्ता से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित समाधान के निर्देश; गर्मी-बारिश और डेंगू-मलेरिया से बचाव के इंतजाम भी परखे

एटा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों तथा जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राकेश धर दुबे के निर्देश पर बुधवार को जिला कारागार एटा का मासिक निरीक्षण किया गया। अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/प्रभारी-सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण युगल चन्द्र चौधरी ने जेल का निरीक्षण कर बंदियों की समस्याएं सुनीं और उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में जानकारी दी।

प्रत्येक बैरक में पहुंचकर बंदियों से की बातचीत

निरीक्षण के दौरान प्रभारी-सचिव ने जिला कारागार की प्रत्येक बैरक में जाकर निरुद्ध बंदियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बंदियों से पूछा कि उनके मुकदमे की पैरवी के लिए अपना अधिवक्ता उपलब्ध है अथवा नहीं। जिन बंदियों के पास अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अधिवक्ता नहीं है, उन्हें बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पात्र बंदियों को निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाएगा।

बंदियों से बातचीत के दौरान कई बंदियों ने जमानत, न्यायालय में पेशी की तारीख और सरकारी अधिवक्ता उपलब्ध कराने सहित अन्य समस्याएं बताईं। प्रभारी-सचिव ने बंदियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को इनके जल्द समाधान के निर्देश दिए।

जमानत और पेशी से जुड़ी समस्याओं का होगा समाधान

निरीक्षण के दौरान सामने आई बंदियों की विधिक समस्याओं को लेकर जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बंदियों को यह भी बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण यदि कोई व्यक्ति अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अधिवक्ता नहीं कर सकता है तो विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उसे निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।

गर्मी और बारिश के मौसम में स्वास्थ्य व्यवस्था पर जोर

निरीक्षण के दौरान जेल में बंदियों की स्वास्थ्य सुविधाओं का भी जायजा लिया गया। प्रभारी-सचिव ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि सभी बंदियों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। विशेष रूप से गर्मी और बारिश के मौसम को देखते हुए बंदियों को बीमारियों से बचाने के लिए आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा गया।

उन्होंने डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए जेल परिसर में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। बदलते मौसम और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए साफ-सफाई, जलभराव की स्थिति और मच्छरों से बचाव के उपायों की भी समीक्षा की गई।

अस्वस्थ बंदी को तत्काल चिकित्सकीय सुविधा देने के निर्देश

प्रभारी-सचिव ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिए कि यदि कोई बंदी अस्वस्थ दिखाई देता है तो उसे तत्काल जेल के चिकित्सक को दिखाया जाए। किसी भी बंदी के स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरती जाए और जरूरत पड़ने पर उसे बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए।

जिला कारागार अस्पताल के निरीक्षण के दौरान वहां की साफ-सफाई व्यवस्था का भी जायजा लिया गया। अस्पताल में भर्ती बंदियों से उनकी बीमारी, उपचार और दवाओं के संबंध में जानकारी ली गई। चिकित्सकीय सुविधाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने पर विशेष जोर

निरीक्षण के दौरान जेल परिसर में साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया। जेल अधीक्षक से कहा गया कि बैरकों, अस्पताल और अन्य स्थानों पर नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जाए। बारिश के मौसम में जलभराव और मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए विशेष निगरानी रखने को कहा गया।

प्रभारी-सचिव ने कहा कि जेल में निरुद्ध बंदियों को भी स्वास्थ्य और विधिक अधिकारों से संबंधित सुविधाएं समय से मिलनी चाहिए। बंदियों की समस्याओं का नियमानुसार त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

ये अधिकारी रहे मौजूद

निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक अंकेक्षिता श्रीवास्तव, डिप्टी जेलर शशी कला वर्मा, कारागार चिकित्सक डॉ. उत्सव जैन सहित जेल के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को बंदियों की विधिक, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए गए।