अलीगंज पुलिस की जांच में खुलासा; सीडीआर और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से खुली पोल, गृह क्लेश से बचने के लिए दर्ज कराई थी फर्जी रिपोर्ट

एटा। जुए में 41 हजार रुपये हारने के बाद गृह क्लेश से बचने के लिए एक युवक ने खुद के साथ तमंचे के बल पर लूट की झूठी कहानी गढ़ दी। अलीगंज पुलिस ने जांच के दौरान सीडीआर, कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर मामले का खुलासा करते हुए शिकायतकर्ता को ही झूठी सूचना देने का आरोपी बनाया है।

मैनपुरी के थाना बिछवां क्षेत्र के ग्राम मोहनपुरा निवासी दीपक कुमार पुत्र रूपबहादुर ने 8 सितंबर 2026 को थाना अलीगंज में तहरीर देकर बताया था कि वह 30 अगस्त को मोटरसाइकिल से मोहनपुरा से अलीगंज आ रहा था। देवतरा पेट्रोल पंप से आगे सफेद अपाचे मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने रास्ता पूछने के बहाने उसे रोक लिया।

दीपक के मुताबिक पीछे बैठे व्यक्ति ने उसकी गर्दन पर तमंचा लगा दिया, जबकि दूसरे व्यक्ति ने उसकी जेब से 41 हजार रुपये निकाल लिए और दोनों फरार हो गए। उसने पुलिस को बताया था कि काफी तलाश के बावजूद आरोपियों का कोई पता नहीं चल सका।

सीडीआर ने खोल दिया राज

एसएसपी एटा के निर्देश पर अलीगंज पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। विवेचना के दौरान शिकायतकर्ता के बयान, मोबाइल की सीडीआर, कैमरा फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगाला गया।

पुलिस ने 30 अगस्त को दीपक के मोबाइल से जिन-जिन नंबरों पर बातचीत हुई थी, उनसे संपर्क कर जानकारी जुटाई। जांच में सामने आया कि 29 और 30 अगस्त को दीपक अपने साथियों के साथ जुआ खेल रहा था और जुए में रुपये हार गया था।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जुए में रकम हारने के बाद उसके पास केवल खर्च लायक पैसे बचे थे। ऐसे में उसके पास 41 हजार रुपये होने और लूट लिए जाने की कहानी पुलिस की जांच में संदिग्ध पाई गई।

जुआ हारने की बात स्वीकार की

पुलिस के मुताबिक दीपक के परिजनों ने भी बताया कि वह जुआ खेलता था। इसके बाद दीपक ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर जुए में रुपये हारने की बात स्वीकार की। पुलिस का कहना है कि गृह क्लेश से बचने के लिए उसने कथित रूप से षड्यंत्र रचकर अपने साथ लूट की झूठी घटना दर्ज कराई थी।

जांच में लूट की घटना सामने न आने के बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता दीपक कुमार को ही झूठी आपराधिक कार्यवाही कराने और किसी व्यक्ति को फंसाने के प्रयास के मामले में आरोपी बनाया है। उसके खिलाफ धारा 240/248(ए) बीएनएस के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

विवेचक

मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक रुपेश कुमार वर्मा द्वारा की जा रही है।