ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी का असर, एडीजे-04 एनडीपीएस कोर्ट ने सुनाया फैसला

एटा। अपराधियों को सजा दिलाकर अपराध नियंत्रण की दिशा में चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत एटा पुलिस की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप करीब 21 साल पुराने स्मैक बरामदगी के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-04 एनडीपीएस एक्ट, एटा की अदालत ने दोनों आरोपियों को सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया।

न्यायालय ने दिनेश पुत्र तुलाराम मिश्रा, निवासी लहसुन मंडी, गांधी स्मारक इंटर कॉलेज के पास, थाना कोतवाली नगर, एटा को दो माह दो दिन के सश्रम कारावास और 2,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अजयपाल पुत्र हजारीलाल, निवासी गंगनपुर, थाना कोतवाली नगर, एटा को एक माह 29 दिन के सश्रम कारावास और 2,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।

2005 में हुई थी स्मैक की बरामदगी

पुलिस के अनुसार 3 जनवरी 2005 को थाना कोतवाली नगर पुलिस को सूचना मिली थी कि दिनेश के कब्जे से 1 ग्राम 400 मिलीग्राम स्मैक और अजयपाल के कब्जे से 1 ग्राम 250 मिलीग्राम स्मैक बरामद हुई है। मामले में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा अपराध संख्या 04/2005 और 05/2005, धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य संकलित करते हुए दोनों अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस के मुताबिक विवेचना पूरी करने के बाद 3 नवंबर 2006 को आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया था।

मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन की प्रभावी पैरवी

पुलिस के अनुसार उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत चिन्हित अभियोगों को प्राथमिकता के आधार पर न्यायालय में प्रभावी ढंग से पैरवी कराने के निर्देश दिए गए हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल द्वारा मामले की लगातार निगरानी की गई। न्यायालय में विचारण के दौरान पुलिस एवं अभियोजन पक्ष ने प्रभावी पैरवी की। इसके परिणामस्वरूप 15 सितंबर 2026 को न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

पुलिस का कहना है कि अपराधियों को न्यायालय से अधिकतम दंड दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी अपराध नियंत्रण की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।