एटा। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश के अधीन संचालित राजकीय फल संरक्षण केंद्र, एटा द्वारा ग्राम पंचायत घर जिरसमी में दो दिवसीय मुख्यमंत्री ग्राम स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने, विभागीय योजनाओं और सरकारी अनुदान की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ जिला उद्यान अधिकारी सुघर सिंह ने फीता काटकर तथा मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उनके मूल्य में वृद्धि की जा सकती है, जिससे किसानों और ग्रामीण युवाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाकर स्वयं का उद्योग स्थापित करने का आह्वान किया।

राजकीय फल संरक्षण केंद्र, एटा के प्रभारी शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में 30 लाभार्थियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के लिए आवश्यक स्टेशनरी सामग्री उपलब्ध कराई गई। प्रशिक्षण के दौरान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना, विभिन्न खाद्य उत्पादों के निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, विपणन, उद्यम प्रबंधन तथा स्वरोजगार की संभावनाओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई।

उन्होंने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक मशीनों एवं उपकरणों पर विभाग द्वारा दिए जाने वाले अनुदान, पात्रता की शर्तें, आवेदन प्रक्रिया और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई। लाभार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर अपना उद्यम शुरू करें और अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएं।

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उपलब्ध व्यावसायिक संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना तथा गांवों में लघु खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।